दुर्गा कवच | Durga Kavach in sanskrit with meaning to please Maa Durga

Durga Kavach | Devi Durga Kavach Easy Sanskrit with meaning (दुर्गा कवच)

Spread Hinduism

दुर्गा कवच हिंदी एवं संस्कृत में  – Durga Kavach or Devi Kavach for Navratra 2020 and every day. देवी दुर्गा कवच (Devi Durga Kavach) के द्वारा सब ओर से सुरक्षित मनुष्य जहाँ-जहाँ भी जाता है,वहाँ-वहाँ उसे धन-लाभ होता है. माँ दुर्गा के इस कवच से सम्पूर्ण कामनाओं की सिद्धि एवं विजय प्राप्ति होती है। दुर्गा कवच (Durga Kavach in Sanskrit) के पाठ से मनुष्य को माँ दुर्गा का ऐसा आशीर्वाद मिलता है मनुष्य जिस भी वस्तु का चिन्तन करता है, उसको आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त कर लेता है। सभी मनुष्य देवी दुर्गा कवच (Maa Durga Devi Kavach) का पाठ करने से निर्भय हो जाता है। सभी वाद विवाद में उसकी पराजय नहीं होती। (Image download/Print) 

ऐसा माना जाता है की देवी दुर्गा का यह कवच स्वयं देवताओं के लिए भी अति दुर्लभ है। मान्यता अनुसार जो मनुष्य प्रतिदिन नियमपूर्वक तीनों संध्याओं के समय श्रद्धा पूर्वक दुर्गा कवच पाठ करता है तो निश्चित ही उसे दैवी कला की प्राप्ति होती है। यदि माँ दुर्गा आपके पाठ से प्रसन्न हो गयीं तो आयु वृद्धि निश्चित ही है.

Request with all readers- , please share this page with all Hindus so that our aim to spread Hinduism and promote the worship of Hindu Gods can be fulfilled. You all believe in Devi Durga and other Hindu Gods and Goddess, Lets share it with everyone on social media. Hanumanjichalisa.com is dedicated to Hindu Mythology and collection of all Bhajans, Mantras, Chalisa and Paths of Hindu Gods in Sanskrit, and Hindi with meanings and benefits/translations etc.

Durga Kavach in Sanskrit | माँ दुर्गा देवी कवच

ॐ नमश्चण्डिकायै।

॥मार्कण्डेय उवाच॥

ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्य चिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥1॥

॥ब्रह्मोवाच॥

अस्ति गुह्यतमं विप्रा सर्वभूतोपकारकम्।
दिव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्वा महामुने॥2॥ (Durga Kavach)

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥3॥

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥4॥

नवमं सिद्धिदात्री च नव दुर्गाः प्रकीर्तिताः।

उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥5॥

अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।

विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥6॥ (Durga Kavach Sanskrit)

न तेषां जायते किञ्चिदशुभं रणसङ्कटे।

नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न ही॥7॥

यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।

ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥8॥

प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।

ऐन्द्री गजसमारूढा वैष्णवी गरुडासना॥9॥

माहेश्वरी वृषारूढा कौमारी शिखिवाहना।

लक्ष्मी: पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥10॥

श्वेतरूपधारा देवी ईश्वरी वृषवाहना।

ब्राह्मी हंससमारूढा सर्वाभरणभूषिता॥ 11॥

इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।

नानाभरणशोभाढया नानारत्नोपशोभिता:॥ 12॥

दृश्यन्ते रथमारूढा देव्याः क्रोधसमाकुला:। 

शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥13॥

खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च। 

कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥ 14॥

दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च। 

धारयन्त्यायुद्धानीथं देवानां च हिताय वै॥ 15॥

नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।

महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥16॥

त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि। 

प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्रि आग्नेय्यामग्निदेवता॥ 17॥ (Devi Kavach)

दक्षिणेऽवतु वाराही नैऋत्यां खङ्गधारिणी। 

प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥ 18॥

उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।

ऊर्ध्वं ब्रह्माणी में रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥ 19॥

एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहाना।

जाया मे चाग्रतः पातु: विजया पातु पृष्ठतः॥ 20॥ (Shri Durga Kavach)

अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।

शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥21॥

मालाधारी ललाटे च भ्रुवो रक्षेद् यशस्विनी।

त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥ 22॥

शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।

कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शङ्करी ॥ 23॥

नासिकायां सुगन्‍धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।

अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥ 24॥

दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।

घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके॥ 25॥

कामाक्षी चिबुकं रक्षेद्‍ वाचं मे सर्वमङ्गला।

ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धारी॥ 26॥

नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।

स्कन्धयोः खङ्गिनी रक्षेद्‍ बाहू मे वज्रधारिणी॥27॥

हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चान्गुलीषु च।

नखाञ्छूलेश्वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्वरी॥28॥

स्तनौ रक्षेन्‍महादेवी मनः शोकविनाशिनी।

हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥ 29॥

नाभौ च कामिनी रक्षेद्‍ गुह्यं गुह्येश्वरी तथा। 

पूतना कामिका मेढ्रं गुडे महिषवाहिनी॥30॥

कट्यां भगवतीं रक्षेज्जानूनी विन्ध्यवासिनी। 

जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी॥31॥ (Shri Durga Kavach)

गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।

पादाङ्गुलीषु श्रीरक्षेत्पादाध:स्तलवासिनी॥32॥

नखान् दंष्ट्रा कराली च केशांशचैवोर्ध्वकेशिनी।
रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्वरी तथा॥33॥


रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती। 

अन्त्राणि कालरात्रिश्च पित्तं च मुकुटेश्वरी॥ 34 ॥

पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा। 

ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसन्धिषु॥35 ॥

शुक्रं ब्रह्माणी मे रक्षेच्छायां छत्रेश्वरी तथा।
अहङ्कारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥36॥

प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्।
वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥37॥

रसे रूपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।

सत्वं रजस्तमश्चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥38॥

आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।

यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥39 ॥

पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥ 40 ॥

रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
तत्सर्वं रक्ष मे देवी जयन्ती पापनाशिनी॥ 41 ॥

रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु। 

तत्सर्वं रक्ष मे देवी जयन्ती पापनाशिनी॥42 ॥


पदमेकं न गच्छेतु यदिच्छेच्छुभमात्मनः। 

कवचेनावृतो नित्यं यात्र यत्रैव गच्छति॥43 ॥

तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयः सर्वकामिकः। 

यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम् ॥44॥

परमैश्वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्

निर्भयो जायते मर्त्यः सङ्ग्रमेष्वपराजितः।॥45॥

त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्

इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्। ॥46॥

य: पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः
दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः॥47॥ 

जीवेद् वर्षशतं साग्रामपमृत्युविवर्जितः

नश्यन्ति टयाधय: सर्वे लूताविस्फोटकादयः॥ 48॥ 

स्थावरं जङ्गमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्

अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले॥49॥ 

भूचराः खेचराशचैव जलजाश्चोपदेशिकाः
सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा। ॥ 50॥ 

अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबला
ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्षगन्धर्वराक्षसा:॥ 51॥

ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते। ॥ 52॥

मानोन्नतिर्भावेद्राज्यं तेजोवृद्धिकरं परम्
यशसा वद्धते सोऽपी कीर्तिमण्डितभूतले ॥ 53 ॥

जपेत्सप्तशतीं चणण्डीं कृत्वा तु कवचं पूरा
यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्। ॥54॥

तावत्तिष्ठति मेदिनयां सन्ततिः पुत्रपौत्रिकी | 
देहान्ते परमं स्थानं यात्सुरैरपि दुर्लभम्। ॥55 ॥

प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः

लभते परमं रूपं शिवेन सह मोदते ॥ॐ॥ ॥ 56॥

।। इति देव्या: कवचं सम्पूर्णम् ।

(Durga Kavach Hindi evam sanskrit me free download)

(Maa Durga Kavach by Narendra Chanchal from YOUTUBE)

Durga Kavach ke Labh (Benefits)

माँ दुर्गा के इस कवच से सम्पूर्ण कामनाओं की सिद्धि एवं विजय प्राप्ति होती है। दुर्गा कवच (Durga Kavach in Sanskrit) के पाठ से मनुष्य को माँ दुर्गा का ऐसा आशीर्वाद मिलता है मनुष्य जिस भी वस्तु का चिन्तन करता है, उसको आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त कर लेता है। सभी मनुष्य देवी दुर्गा कवच (Maa Durga Devi Kavach) का पाठ करने से निर्भय हो जाता है। सभी वाद विवाद में उसकी पराजय नहीं होती। 

ऐसा माना जाता है की देवी दुर्गा का यह कवच स्वयं देवताओं के लिए भी अति दुर्लभ है। मान्यता अनुसार जो मनुष्य प्रतिदिन नियमपूर्वक तीनों संध्याओं के समय श्रद्धा पूर्वक दुर्गा कवच पाठ करता है तो निश्चित ही उसे दैवी कला की प्राप्ति होती है। यदि माँ दुर्गा आपके पाठ से प्रसन्न हो गयीं तो आयु वृद्धि निश्चित ही है.

Shri Durga Kavach with Durga Chalisa |दुर्गा चालीसा हिंदी में पाठ - Hindi for all Hindus-

After Durga Kavach, We are sharing Durga Chalisa also for the readers.

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।

नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥

(Durga Chalisa)

तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥

(Durga Chalisa)

कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ संतन पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब॥

अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

(Durga Chalisa)

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥

दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

 

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

(Durga Chalisa)

Maa Durga Image Download
Maa Devi Durga Kavach in Sanskrit with Meaning and Benefits

Also see video at Youtube

Devi Kavach and More-

दुर्गा कवच | Durga Kavach in sanskrit with meaning to please Maa Durga

Durga Kavach | Devi Durga Kavach Easy Sanskrit with meaning (दुर्गा कवच)

दुर्गा कवच हिंदी एवं संस्कृत में  – Durga Kavach or Devi Kavach for Navratra 2020 and every day. देवी दुर्गा कवच (Devi Durga Kavach) के द्वारा सब ओर से सुरक्षित मनुष्य जहाँ-जहाँ भी जाता है,वहाँ-वहाँ उसे धन-लाभ होता है. माँ दुर्गा के इस कवच से सम्पूर्ण कामनाओं की सिद्धि एवं विजय प्राप्ति होती है। दुर्गा कवच (Durga Kavach in Sanskrit) के पाठ ... Read more Durga Kavach | Devi Durga Kavach Easy Sanskrit with meaning (दुर्गा कवच)

Read More
कनकधारा स्तोत्रम हिंदी में और इंग्लिश में , kanakadhara stotram hindi Laxmi

कनकधारा स्तोत्रम | Kanakadhara Stotram in Hindi and English with Image, Video – Updated May 2020

कनकधारा स्तोत्रम पाठ (वैदिक संस्कृत) (Kanakadhara Stotram in hindi and english)- अपार धन की प्राप्ति हेतु एक बहुत ही प्रभाव शाली स्तोत्र है। आज जब हर एक अपने जीवन में ‍आर्थिक तंगी को परेशान  हैं और धन की प्राप्ति के लिए कोई भी उपाय करने को तैयार है – कनकधारा स्तोत्रम  (Kanakadhara Stotram)– धन प्राप्ति के लिए एक अचूक ... Read more कनकधारा स्तोत्रम | Kanakadhara Stotram in Hindi and English with Image, Video – Updated May 2020

Read More
devi Durga Chalisa दुर्गा चालीसा

दुर्गा चालीसा | Devi Durga Chalisa | Maa Durga Chalisa

दुर्गा चालीसा  पाठ हिंदी में  – (Durga Chalisa in Hindi) Updated May  2020, पढ़िये ” माँ दुर्गा चालीसा” और डाउनलोड कीजिये। Durga Chalisa के पाठ से पाएंगे माँ दुर्गा जी की कृपा और जिसका पाठ निश्चित ही लाभकारी है. सभी पाठको से निवेदन है की माँ दुर्गा चालीसा “Durga Chalisa” को अपने सभी परिवार जानो एवं मित्रो से ज़रूर शेयर करें. Dear Readers, please share this page with ... Read more दुर्गा चालीसा | Devi Durga Chalisa | Maa Durga Chalisa

Read More
Translate

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.